सुधीर जैसे ही घर पहुंचे थे तब मां ने कहा आ गया बेटा हाथ मुंह धोकर आ जब तक मैं चाय बनाती हूं थोड़ी देर बाद सुधीर चाय पी रहे थे मां ने प्यार से कहा सुधीर में कुछ कहना चाहती हूं जी कहिए बेटा में बूढ़ी हूं पता नहीं कब भगवान् मुझे अपने पास बुला लें में चाहतीं हूं कि तूं दूसरा विवाह कर के घर बसा लें कुछ पल सुधीर ने विचार किया था फिर नहीं मां में बच्चों को किसी दूसरी महिला को नहीं सोप सकता दोनों बच्चे बालिग हो रहें हैं उन्हें अभी हमारी जरूरत है हमारे संस्कार कि जरुरत है फिर हंसकर अभी आप कहीं नहीं जाएगी बच्चों कि शिक्षा और शादी आप को ही करना है अच्छा बच्चे दिखाईं नहीं दे रहे हैं । गुड़िया कोचिंग क्लास और चिराग दोस्तों के साथ गार्डन में क्रिकेट खेलने गया है मां ने कहा था सुधीर का खुशहाल परिवार था पत्नी सुनंदा पड़ी लिखीं संस्कारी घरेलू महिला थी घर कि सारी जिम्मेदारी बखूबी निभा ना जानतीं थी सासु मां को अपनी मां जैसा सम्मान देती थी ऐसे में सुधीर हर प्रकार से तनाव रहित होकर अपने काम पर ध्यान देते थे उनकी खुद कि किताबों कि छोटी सी दुकान थी उसी दुकान से परिवार का भर...
शाम का समय था आसमान में बादल छाए हुए थे हल्की हल्की रिमझिम बारिश हो रही थी कहीं दूर बिजली चमक रही थी ऐसे ही मौसम में अविनाश धीरे धीरे मोटरसाइकिल चलाते हुए घर जा रहें थे चूंकि शाम को इन्दौर का ट्राफिक यूं ज्यादा हों जाता है लेकिन आज भारी ट्राफिक साथ ही पानी बरसना इसलिए दो पहिया वाहन चालकों को बहुत परेशानी आ रही थी खैर अविनाश धीरे धीरे बचते बचाते घर पहुंच गया था हेलमेट रेनकोट निकाल कर उसने मोटरसाइकिल पर ही टांग दिया था जैसे ही अन्दर पहुंचा देखा श्री मति अविनाश का चेहरा लाल है उसने प्यार से पूछा था। क्या हुआ क्या नहीं हुआ आज मकान मालिक आया था दस बातें सुनाकर चला गया लेकिन क्यों हम किराया बिजली का बिल समय पर देते हैं अविनाश ने शांति से कहा था । सब्जी के छिलके बरामदे में पड़े हुए थे उस को देखकर भड़क उठा श्री मति अविनाश ने तुनककर जबाब दिया था ग़लती तुम्हारी हैं साफ सफाई रखनी चाहिए। दौनो कि सहज भाव से बात चल रही थी तभी बेटी आस्था बीच में आ गई देखिए पापा आप अपना घर कब लें रहें हैं बस अब घर लेना है परिवार में तीन सदस्य ऐक दूसरे से वाद-विवाद कर रहे थे इस बीच बे...